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वी.आई.पी. के ठाठ-बाट!

टिप्पणी
कोई कितना ही बड़ा अपराधी हो या फिर शातिर आरोपी, अगर वह 'वी.आई.पी'. है तो सब उसके आगे सलाम बजाते ही मिलेंगे। चाहे नेता हो या अभिनेता या फिर कथित साधु-महात्मा। जोधपुर जेल में बंद हमारे स्वनामधन्य आसाराम बापू उदाहरण हैं। उनके वी.आई.पी. ट्रीटमेंट में कोई कसर नहीं छोड़ी जा रही। सरकारी तंत्र में जैसे एक-दूसरे को पीछे छोडऩे की होड़ मची है। जेल-प्रशासन सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बावजूद आसाराम को वह सब सुख-सुविधाएं मुहैया कराने में दुबला हुआ जा रहा है जो एक आम आरोपी को जेल में कतई संभव नहीं है। दूसरी तरफ सरकारी वैद्यजी अन्य सारे मरीजों को छोड़कर बुधवार को अस्पताल के विशेष कक्ष में आसाराम की पंचकर्म-चिकित्सा करने में व्यस्त रहे। संभव है मेडिकल बोर्ड की सलाह पर 'बीमारÓ आसाराम को उनकी मांग पर आयुर्वेद की यह विशेष चिकित्सा सुविधा मुहैया कराई गई हो। हालांकि फोटो देखकर नहीं लगता कि वे बीमार हैं, शायद भीतर कोई गड़बड़ी हो। उनकी चिकित्सा पर कोई आपत्ति नहीं है। लेकिन एतराज चिकित्सा के तरीके पर है। भारी पुलिस लवाजमे के साथ आसाराम को आयुर्वेद चिकित्सालय लाया गया। आगमन के साथ ही उनका विशिष्ट उपचार शुरू हो गया। ढाई घंटे तक मरीज भटकते रहे। आयुर्वेद-चिकित्सा के कई चरण हैं। इसलिए हो सकता है कि आसाराम चिकित्सालय में बार-बार लाये जाएं। और बार-बार मरीज परेशान होते रहें। आखिर यह क्या तमाशा है! जोधपुर का जेल-प्रशासन शुरू से ही आसाराम के चरणों में बिछा हुआ नजर आता है। उन्हें जब गिरफ्तार किया गया था तो पुलिस उन्हें विमान से जोधपुर लेकर आई थी। साधारण अभियुक्त की तरह आसाराम को हवालात में रखने की बजाय सुविधाजनक आर.ए.सी. मुख्यालय में रखा गया। दूध और फल पेश किए गए थे। उनकी विभिन्न फरमाइशें पूरी की गईं। आसाराम के इर्द-गिर्द भारी सुरक्षा बल तैनात किए गए। यह सब देखकर सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस जी.एस. सिंघवी व वी. गोपाल गोड़ा की पीठ ने राजस्थान सरकार की आलोचना की थी। केन्द्रीय गृह मंत्रालय ने भी स्पष्ट आदेश दिया था कि आसाराम को संत नहीं सामान्य व्यक्ति माना जाए और इसी रूप में व्यवहार किया जाए। लेकिन आसाराम की आवभगत में कोई कमी न तब आई थी और न अब आई है। भले ही सरकार बदल गई। आसाराम के वी.आई.पी. ठाठ-बाट बरकरार है। जेल मैन्युअल की धज्जियां उड़ रही हैं। सवाल है आखिर जेलों में भी इन लोगों के शाही ठाठ-बाट क्यों कायम रहते हैं। पुलिस, जेल के अधिकारी तथा प्रशासन तंत्र उनके सामने घुटने टेके नजर आता है। दो दिन पहले लालू यादव जमानत पर छूट कर लाव-लश्कर के साथ घर पहुंचे। रास्ते में पुलिस के लोग उनके चरण धोते और चप्पल हाथ में उठाए देखे गए। संजय दत्त को बार-बार जेल से पेरोल मिल जाती है। जेल में उनको शराब मुहैया कराने का मामला अभी भी सुर्खियों में है। शासन-तंत्र का इस तरह वी.आई.पी. अपराधियों-आरोपियों के समक्ष समर्पण-भाव का राज क्या है— यह जनता को पता चलना चाहिए। आसाराम मामले में जोधपुर जेल प्रशासन की जांच जरूरी है। क्यों हिदायतों के बावजूद नाबालिग लड़की से दुराचार के आरोपी को लगातार विशेष सुविधाएं मुहैया कराई जा रही है। आसाराम पर और भी कई आरोप हैं। कौन-कौन अधिकारी उनके खैरख्वाह बने हुए हैं? क्यों बने हुए हैं—यह सब सामने आना चाहिए। नए डीजीपी ने बुधवार को ही जयपुर में चेताया—सुधर जाएं भ्रष्ट पुलिसकर्मी। मगर पुलिस है कि सुधरती नहीं।

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1 comments:

Rishang Sharma said...

first of all
1.shame on you that you listen to these fake media persons who want to put high on their trp by putting false allegations on a saint who has given his whole life for the welfare of the mankind
2.do you and your so called "god media" have any proof about any allegations ......they just keep on saying that"" we are showing you the proof""
and what is it actually "A HAND MADE VIDEO BY THESE MEDIA CULPRITS"...
which is a proof that you are LITERATE DUMBOSSSS...
SHAME ON THOSE PEOPLE WHO KEEP ON BLAMING SAINTS