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इंटरनेट और आपका बच्चा

इंटरनेट आजकल के बच्चों की जिन्दगियों का अहम हिस्सा बन गया है। इसी के साथ माता-पिता की दुविधाएं भी बढ़ गई हैं। क्योंकि एक ओर इंटरनेट आपके बच्चे का होमवर्क या स्कूल के प्रोजेक्ट्स पूरे करने में मदद करता है। आपके बच्चे को नई-नई जानकारियों से अपडेट करता है। वहीं दूसरी ओर बच्चों के यौन शोषण व भटक जाने की राह भी तैयार करता है। इंटरनेट पर क्या सही है, क्या गलत—इसका फैसला बच्चे नहीं कर पाते।
डेस्कटॉप, लेपटॉप, गैलेक्सी नोट के बाद स्मार्ट फोन जैसी अत्याधुनिक तकनीक ने तो इंटरनेट को जैसे उसकी मुट्ठी  में ला दिया है। आपका बच्चा इंटरनेट पर क्या कर रहा है, कौन-सी साइट देख रहा है, यह पता करना और भी मुश्किल हो गया है। आज बच्चों में इंटरनेट का सुरक्षित और लाभकारी उपयोग एक चुनौती है। सचमुच इंटरनेट और बच्चों का रिश्ता बहुत संवेदनशील हो गया है।
भारत में इंटरनेट सुरक्षा की मुहिम चला रही 'डेवलपिंग इंटरनेट सेफ कम्युनिटी' (डी.आई.एस.सी.) नामक संस्था 11 फरवरी को 'इंटरनेट सेफ्टी डे' मनाने की तैयारी कर रही है। इस संस्था के अनुसार भारत में इंटरनेट के तेज प्रसार का सीधा असर बाल यौन शोषण और पोर्नोग्राफी के प्रयोग पर पड़ रहा है। दरअसल, इंटरनेट से बच्चों को दो तरह से ज्यादा खतरा है। पहला, 'सायबर बुलिंग', जिसके जरिए बच्चे किसी की शरारत का आसानी से शिकार हो जाते हैं। दूसरा, चाइल्ड पोर्नोग्राफी। इंटरनेट के जरिए यह बाल यौन शोषण का खतरनाक हथियार बनता जा रहा है।
यूनिसेफ की एक रिपोर्ट के अनुसार दुनिया भर में 40 लाख ऐसी वेबसाइट्स हैं, जिनमें बच्चों का अश्लील चित्रण किया गया है। वहीं डी.आई.एस.सी. के अनुसार भारत में हर वक्त करीब पांच हजार लोग इंटरनेट पर बाल यौन शोषण से जुड़ी सामग्रियों के प्रसार का हिस्सा बने हुए हैं। ऐसे में हमें यह चिन्ता होनी चाहिए कि हमारे बच्चे इंटरनेट पर होने वाली अश्लील या विवादित गतिविधियों का शिकार न हो जाए। आज के ग्यारह-बारह साल के बच्चे जब से होश संभालते हैं, तब से ही मोबाइल और इंटरनेट की दुनिया से जुड़ जाते हैं। यही वजह कई बार माता-पिता की परेशानी का कारण भी बन जाती है। एक उदाहरण से इसे समझा जा सकता है। बारह वर्षीय अंशुल ने एक बार अपने स्मार्ट फोन का इस्तेमाल कर सोशल नेटवर्क साइट पर लॉग ऑन किया, पर वह लॉगआउट करना भूल गया। इसका फायदा उठाकर किसी शरारती व्यक्ति ने उसके पेज पर किसी लड़की के बारे में बेहूदा बातें लिख दीं। जाहिर है, बच्चे के पेज पर बहुत सारे कमेंट्स आए, जिसकी वजह से उसे अपने दोस्तों और परिवार में काफी शर्मिन्दा होना पड़ा। लड़की के घर वालों ने पुलिस केस की धमकी दी। आखिर अंशुल के माता-पिता को बाकायदा उनसे माफी मांगनी पड़ी। अंशुल के साथ जो हुआ—यही 'सायबर बुलिंग' है, जिसके शिकार अक्सर बच्चे इंटरनेट का इस्तेमाल करते हुए होते हैं। माइक्रोसॉफ्ट के अनुसार भारत में पचास फीसदी से ज्यादा बच्चे 'सायबर बुलिंग' का शिकार होते हैं। ज्यादातर मामलों में बच्चों को मालूम नहीं होता कि वे इस समस्या से कैसे निपटें। लिहाजा बच्चे अवसाद से घिर जाते हैं। कई मामलों में आत्महत्या तक कर बैठते हैं। टेलीनॉर द्वारा किए गए एक अध्ययन के अनुसार सन् 2017 तक भारत में 13 करोड़ बच्चे इंटरनेट से जुड़ जाएंगे। ऐसे में बच्चों को 'सायबर बुलिंग' से बचाने के तकनीकी उपायों के साथ सम्बंधित कानून के प्रावधानों को कड़ाई से लागू करने की बड़ी चुनौती होगी।
बच्चों से सम्बंधित पोर्नोग्राफी का निर्माण और प्रसार भी इंटरनेट की एक गंभीर समस्या है। डी.आई.एस.सी. के परियोजना अधिकारी सलीम अहमद के अनुसार— 'इंटरनेट पर बच्चे खासतौर पर खतरे में होते हैं। सोशल नेटवर्किंग साइटों पर बच्चे अपनी गलत उम्र बताकर अकाउंट खोल लेते हैं। इन साइटों पर आपराधिक प्रवृत्ति के लोग पहले से घात लगाए रहते हैं। वे बच्चों को बहला-फुसला कर उनकी सही उम्र का पता करने के बाद आसानी से उन्हें अपने चंगुल में फांस लेते हैं।' सवाल है इन खतरों से बच्चों को कैसे महफूज रखा जाए? डी.आई.एस.सी., सी.एम.ए.आई., साइबर पीस जैसी संस्थाओं का मानना है कि नए आई.टी. कानून में ऐसे अपराध के खिलाफ कड़े प्रावधान है, लेकिन इनको सुचारु ढंग से लागू करने की जरूरत है। भारत में कानूनों की क्रियान्विति और निगरानी की क्या स्थिति है, यह किसी से छुपा नहीं है। ऐसे में तकनीकी उपायों की आवश्यकता को मजबूती से रेखांकित करने की ज्यादा जरूरत है। हमें ऐसी सॉफ्टवेयर प्रणाली अपनानी होगी जो बच्चों की अश्लील तस्वीरों और पोर्नोग्राफी की खोज को रोकती हों। 'सायबर बुलिंग' में शरारती तत्त्वों की आसानी से पहचान करती हो। तथा बच्चों द्वारा अपनी उम्र छिपाकर अवांछित अकाउंट्स खोलने पर पाबंदी लगाती हो। गूगल और माइक्रोसॉफ्ट जैसी कंपनियों ने कुछ हद तक ऐसे उपाय किए भी हैं, लेकिन इन उपायों को अभी और विकसित करने की जरूरत है। इनकी लोगों तक जानकारी पहुंचे, यह भी जरूरी है। साथ ही माता-पिता को अधिक सतर्क और जागरूक होना होगा। अगर आप चाहते हैं कि आपका बच्चा अत्याधुनिक गैजेट्स और इंटरनेट से जुड़कर तरक्की की तेज रफ्तार पर चले तो आपको अपने बच्चे पर निगरानी तो रखनी ही होगी।

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3 comments:

HARSHVARDHAN said...

बढ़िया लेख।। फेसबुक पर शेयर भी कर रहा हूँ :-)

आपको बसन्तपंचमी और सरस्वती पूजा की हार्दिक शुभकामनाएँ।।

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केवल राम : said...

बेहतर आलेख है .....आपका ब्लॉग निश्चित रूप से समसामयिक मुद्दों पर अच्छी जानकारी से भरा हुआ है ....आभार आपका ...!!!!

HARSHVARDHAN said...

आपकी इस प्रस्तुति को आज की बसन्त पंचमी, विश्व कैंसर दिवस, फेसबुक के 10 साल और ब्लॉग बुलेटिन में शामिल किया गया है। कृपया एक बार आकर हमारा मान ज़रूर बढ़ाएं,,, सादर .... आभार।।